बचपन की यह आदत बन सकती है जानलेवा! रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। बच्चों को मीठे पेय पदार्थ पिलाने की आदत भविष्य में उनकी सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि बचपन में शर्करा युक्त पेय पदार्थों का नियमित सेवन मोटापा, उच्च रक्तचाप, टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

हाल ही में किए गए एक व्यापक अध्ययन में 85 अलग-अलग शोधों का विश्लेषण किया गया। इसमें बच्चों और वयस्कों सहित 5.4 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। शोध में पाया गया कि जिन बच्चों ने मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम किया, उनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अपेक्षाकृत कम बढ़ा। वहीं, जिन वयस्कों ने अपनी दिनचर्या से शर्करा युक्त पेय हटाए, उनके वजन में कमी देखी गई, जबकि इनका सेवन जारी रखने वालों का वजन लगातार बढ़ता गया।

विशेषज्ञों के अनुसार बचपन में बनने वाली खान-पान की आदतें व्यक्ति के पूरे जीवन की सेहत को प्रभावित करती हैं। सोडा, एनर्जी ड्रिंक और पैक्ड फ्रूट जूस जैसे पेय अतिरिक्त चीनी और कैलोरी से भरपूर होते हैं, जो मोटापे का प्रमुख कारण बनते हैं। बढ़ता मोटापा आगे चलकर उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि कई लोग पैक्ड फ्रूट जूस को स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं, जबकि इनमें अक्सर अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है और प्राकृतिक फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है। लगातार अधिक चीनी का सेवन शरीर की रक्त वाहिकाओं और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है। इतना ही नहीं, मीठे पेय पदार्थ पीने वाले बच्चे अक्सर पौष्टिक भोजन से दूरी बना लेते हैं, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों के लिए पानी को मुख्य पेय बनाया जाए। पैक्ड जूस की जगह साबुत फल खिलाएं और बिना चीनी वाला दूध नियमित आहार में शामिल करें। मीठे पेय पदार्थों का सेवन केवल कभी-कभार और सीमित मात्रा में ही करना बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माना गया है।

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