11 महीने से अटके मेडिकल स्टोर लाइसेंस, मध्यप्रदेश में 20 हजार दुकानें संकट में

भोपाल। मध्यप्रदेश में मेडिकल स्टोर संचालकों के सामने बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश के करीब 20 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर पिछले 11 महीनों से लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होने के कारण तकनीकी रूप से अवैध स्थिति में संचालित हो रहे हैं। दवा कारोबारियों का आरोप है कि ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीकी खामियां और फैमिली आईडी को अनिवार्य किए जाने के बाद से हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं, जिससे उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, लाइसेंस नवीनीकरण के लिए बड़ी संख्या में आवेदन समय पर जमा किए गए थे, लेकिन तकनीकी कारणों से उनका निपटारा नहीं हो सका। इसके चलते मेडिकल स्टोर संचालकों को बार-बार संबंधित विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

दवा विक्रेताओं का कहना है कि समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होने से उनके कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि वैध आवेदन लंबित होने के बावजूद वे कार्रवाई की आशंका में कारोबार करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि गलती उनकी नहीं, बल्कि प्रक्रिया में मौजूद तकनीकी बाधाओं की है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसका असर केवल दवा कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मरीजों को भी दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में इसका प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है।

दवा कारोबारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि लंबित आवेदनों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए और लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुगम बनाया जाए। उनका कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो हजारों मेडिकल स्टोर संचालकों के सामने कानूनी और आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

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