जंतर-मंतर पर आंदोलन का 11वां दिन, भूख हड़ताल ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन मंगलवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी शिक्षा मंत्री प्रमोद प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रदर्शन अब केवल नीट परीक्षा तक सीमित न रहकर सरकारी जवाबदेही और युवाओं के भविष्य से जुड़े बड़े मुद्दे का रूप ले चुका है।

प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। उनकी भूख हड़ताल का मंगलवार को तीसरा दिन था। सीजेपी द्वारा जारी मेडिकल अपडेट के अनुसार, उनका ब्लड शुगर 66 दर्ज किया गया, जिसे सामान्य स्तर से कम बताया गया। वहीं उनका रक्तचाप 117/60, ऑक्सीजन सैचुरेशन 96 प्रतिशत और पल्स रेट 92 रिकॉर्ड किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार गर्मी में बिना भोजन के रहने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। हालांकि चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी तबीयत और खराब होती है तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की होगी।

इस बीच आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों की तुलना “वायरस” से किए जाने पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी छात्र और युवा लोकतांत्रिक तरीके से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। दीपके ने कहा, “हम वायरस नहीं, बल्कि व्यवस्था में फैली खामियों के खिलाफ वैक्सीन हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटाले शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके कई समर्थकों और छात्र कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर पहुंचने से रोका गया। हालांकि प्रशासन ने पहचान पत्र संबंधी नियमों का हवाला दिया है। सीजेपी नेताओं का कहना है कि भारी पुलिस तैनाती और तमाम प्रतिबंधों के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

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