देहरादून में बच्चों के लिए NSD की खास कार्यशाला, मोबाइल से दूर होकर सीख रहे रंगमंच

 देहरादून। सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल (एसबीपीएस) में इन दिनों नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के सहयोग से 30 दिवसीय बाल रंगमंच कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। 20 जुलाई तक चलने वाली इस कार्यशाला में 8 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में अभिनय कौशल, रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और सामाजिक समझ विकसित करना है।

कार्यशाला का संचालन देहरादून की प्रतिष्ठित संस्था ‘ड्रामा डेरा’ के संस्थापक एवं वरिष्ठ रंगकर्मी शुबा सुभाष रावत के निर्देशन में किया जा रहा है। पहली बार विशेष रूप से बच्चों के लिए एक माह की इस विस्तृत रंगमंच कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसमें देहरादून के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी शामिल हैं।

बलूनी ग्रुप के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि रंगमंच के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता, एकाग्रता और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है। साथ ही यह पहल बच्चों को मोबाइल और स्क्रीन की बढ़ती लत से दूर रखने में भी सहायक सिद्ध होगी।

कार्यशाला की सह-निर्देशक सोमाली बिष्ट ने बताया कि बच्चे पूरे उत्साह और लगन के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। कार्यशाला के दौरान उनमें सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। कई प्रतिभागियों ने बताया कि उनकी आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है, संवाद कौशल बेहतर हुआ है और एकाग्रता में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।

कार्यशाला के समापन अवसर पर बच्चों द्वारा तैयार की गई नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा, जिसमें वे अपने सीखे हुए अभिनय और रंगमंच कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

विद्यालय के प्रधानाचार्य पंकज नौटियाल ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने कार्यशाला के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। उनका मानना है कि इस तरह के रचनात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ विद्यालय में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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