देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने खरीफ सीजन-2026 के दौरान संभावित कमजोर मानसून अथवा वर्षा की कमी की स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा और कृषि उत्पादन को प्रभावित होने से बचाने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है।
मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों की वर्चुअल बैठक में भाग लेते हुए गणेश जोशी ने उत्तराखंड की तैयारियों की जानकारी साझा की। बैठक में मानसून में संभावित देरी या कम वर्षा की स्थिति में अपनाई जाने वाली आकस्मिक योजनाओं की समीक्षा की गई। इस दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधीन सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर ड्राईलैंड एग्रीकल्चर द्वारा तैयार राष्ट्रीय कंटिन्जेंसी प्लान और कृषि विज्ञान केंद्रों की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का भी प्रस्तुतीकरण किया गया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिए कि संभावित परिस्थितियों का सामना करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि उत्तराखंड कृषि विभाग ने कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से राज्य के सभी जनपदों के लिए विस्तृत कृषि आकस्मिकता योजना तैयार की है। राज्य की भौगोलिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीतियां बनाई गई हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मानसून में देरी होती है तो किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली तथा सूखा सहन करने वाली फसलों के गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में मंडुवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, राजमा और तिल जैसी पारंपरिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं मैदानी इलाकों में धान के विकल्प के रूप में मक्का, मूंग, उड़द, अरहर तथा चारा फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।
गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच किसानों की आय और कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखना है, ताकि प्रदेश का कृषि क्षेत्र मजबूती के साथ आगे बढ़ता रहे।