जम्मू। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती का माता खीर भवानी मंदिर दौरा राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। कश्मीरी पंडित समुदाय से अतीत की पीड़ादायक घटनाओं को भुलाकर साझा भविष्य के निर्माण की अपील करने के बाद उन्हें मंदिर परिसर में विरोध का सामना करना पड़ा। उनके बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे कश्मीरी पंडितों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।
वार्षिक खीर भवानी मेले के अवसर पर मंदिर पहुंचीं महबूबा मुफ्ती ने वहां मौजूद कश्मीरी पंडित श्रद्धालुओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोग पूरे दिल से कश्मीरी पंडितों का स्वागत करते हैं और अब समय आ गया है कि अतीत में जो कुछ भी हुआ, उसे पीछे छोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण किया जाए।
हालांकि, महबूबा के इस बयान के तुरंत बाद मंदिर परिसर में मौजूद कुछ कश्मीरी पंडितों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। श्रद्धालुओं ने “कश्मीर हमारा है” और “भारत माता की जय” जैसे नारे लगाए। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि विस्थापन और हिंसा से जुड़े समुदाय के दर्द को केवल भूल जाने की अपील के जरिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बाद में महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर मेले के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों और मुसलमानों के बीच मौजूद स्नेह और आपसी विश्वास उन दीवारों को कमजोर कर रहा है, जिन्हें कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक हितों के लिए खड़ा किया है। उन्होंने कश्मीरी पंडित डॉक्टरों के योगदान की सराहना करते हुए सरकार से समुदाय को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की।
भाजपा ने महबूबा मुफ्ती के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय ने दशकों तक असाधारण पीड़ा और विस्थापन का सामना किया है। भाजपा नेता जहांजेब सिरवाल ने कहा कि वास्तविक मेल-मिलाप तभी संभव है, जब इतिहास की त्रासदियों और गलतियों को ईमानदारी से स्वीकार किया जाए। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से संवेदनशील मुद्दों पर बयान देते समय सावधानी बरतने की भी सलाह दी।
यह घटनाक्रम एक बार फिर कश्मीर में न्याय, पुनर्वास और सामाजिक मेल-मिलाप के प्रश्नों पर मौजूद गहरे मतभेदों को उजागर करता है।