वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक संघर्षों को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उनके प्रशासन ने अब तक आठ युद्धों और गंभीर विवादों को रोकने या शांत कराने में भूमिका निभाई है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान से जुड़ा संकट उनके लिए सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार की विदेश नीति का मुख्य आधार सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीतिक संवाद, राजनीतिक समझौते और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को समाप्त करने के प्रयासों का उद्देश्य मानवीय नुकसान को कम करना, आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और विभिन्न क्षेत्रों में शांति स्थापित करना था।
ट्रंप ने कहा कि ईरान से संबंधित विवाद अन्य सभी संघर्षों की तुलना में कहीं अधिक जटिल था। इसके पीछे कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे में क्षेत्रीय शक्तियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय हित भी जुड़े हुए हैं, जिसके कारण सभी पक्षों को एक साझा सहमति तक लाना आसान नहीं था। उनके अनुसार, इसी वजह से ईरान संकट को संभालना सबसे कठिन कार्य साबित हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में रक्षा मंत्री और अमेरिकी सेना की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि संकट और तनावपूर्ण परिस्थितियों में अमेरिकी सशस्त्र बलों ने बेहद पेशेवर और प्रभावी ढंग से काम किया है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि उनके इजराइल के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। साथ ही उन्होंने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि इन देशों के साथ अमेरिका के संबंध मजबूत और सहयोगपूर्ण हैं।
ट्रंप ने जिन आठ संघर्षों का उल्लेख किया उनमें इजराइल-ईरान, इजराइल-हमास, सर्बिया-कोसोवो, आर्मेनिया-अजरबैजान, रवांडा-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मिस्र-इथियोपिया, थाईलैंड-कंबोडिया और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव शामिल हैं।
हालांकि, ट्रंप के इन दावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि इन संघर्षों में अमेरिका की भूमिका कितनी निर्णायक रही और क्या इनका स्थायी समाधान वास्तव में सुनिश्चित हो पाया है, यह अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है।