क्या जैविक खेती बदलेगी गांवों की तस्वीर? उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किसानों से की बड़ी अपील

बिलासपुर। कृषि विभाग की एक्सटेंशन रिफॉर्म्स (आत्मा) योजना के तहत कृषि महाविद्यालय में आयोजित जैविक कृषि कार्यशाला में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किसानों से जैविक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही खेती गांवों की समृद्धि और किसानों की आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना आवश्यक हो गया है।

कार्यशाला का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किया। इस अवसर पर बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष ललिता संतोष कश्यप, नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अरुण साव ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और कृषि भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है, वहीं इसका दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। ऐसे में जैविक खेती समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।

उपमुख्यमंत्री ने किसानों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने, पशुपालन और गौसंवर्धन को कृषि व्यवस्था से जोड़ने तथा सामूहिक प्रयासों के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. गीत शर्मा ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की वैज्ञानिक पद्धतियों से अवगत कराना है। कृषि विशेषज्ञ बृजलाल राठौर ने जैविक खेती के लाभ, तकनीक और संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इससे उत्पादन लागत घटती है और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है।

कार्यशाला के दौरान जैविक खेती में उल्लेखनीय कार्य करने वाले किसानों जदूनंदन साहू, हजारीलाल पटेल, श्रद्धा मिश्रा और शिल्पी राजपूत समेत अन्य किसानों को सम्मानित किया गया। किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक उर्वरकों के उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण भी दिया गया।

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