उद्धव ठाकरे को सबसे बड़ा झटका! 6 सांसदों ने छोड़ा साथ, महाराष्ट्र की राजनीति में मची हलचल

मुंबई/नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने बुधवार को नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने का फैसला किया। यह उद्धव ठाकरे की पार्टी में दूसरी बड़ी टूट मानी जा रही है। इससे पहले वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। बाद में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को ही मूल शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी, जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने अपने गुट का नाम शिवसेना (यूबीटी) रखा था।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह सिलसिला यहीं नहीं रुक सकता। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) के 20 विधायकों में से करीब 16 विधायक भी शिंदे गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो उद्धव ठाकरे के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट साबित हो सकता है।

इस राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा लाभ केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को मिलने की संभावना जताई जा रही है। छह सांसदों के शामिल होने के बाद लोकसभा में एनडीए का संख्या बल और मजबूत हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों और संभावित संवैधानिक संशोधनों के लिए अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

उधर, संभावित बगावत की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने मुंबई में आयोजित प्रेस वार्ता में नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बागी सांसदों पर पार्टी और कार्यकर्ताओं के विश्वास को तोड़ने का आरोप लगाया। राउत ने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने टिकट देकर संसद तक पहुंचाया, उन्हें नैतिकता के आधार पर पहले इस्तीफा देना चाहिए और फिर किसी अन्य दल से चुनाव लड़ना चाहिए।

महाराष्ट्र की राजनीति में इस नए घटनाक्रम ने आने वाले दिनों की राजनीतिक तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है।

 

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