पूर्वोत्तर में बड़ा बदलाव! 2027 तक AFSPA हटाने की तैयारी, अमित शाह का बड़ा संकेत

 नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्वोत्तर भारत के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और आर्थिक विकास को नई गति देने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा हालात बने रहते हैं तो वर्ष 2027 तक एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) हटा लिया जाएगा। साथ ही असम और नागालैंड के बीच सीमा विवाद वाले क्षेत्र में लंबे समय से बंद पड़े तेल और गैस उत्पादन को दोबारा शुरू करने का फैसला भी लिया गया है।

अमित शाह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की पहल और विभिन्न उग्रवादी संगठनों के साथ हुए शांति समझौतों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसके कारण पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा और उग्रवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने बताया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार के चलते AFSPA के दायरे को लगातार कम किया जा रहा है और आने वाले समय में इसे और सीमित करने की योजना है।

गृह मंत्री ने भरोसा जताया कि अगले वर्ष तक अधिकांश क्षेत्रों से यह कानून हटाया जा सकता है, जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी और विकास कार्यों को और गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर को देश के सबसे शांत और विकसित क्षेत्रों में शामिल करना है।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा में शाह ने बताया कि केंद्र सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच सीमा विवाद वाले क्षेत्र में तेल एवं गैस उत्पादन दोबारा शुरू करने पर सहमति बन गई है। यह क्षेत्र लंबे समय से विवाद और प्रशासनिक कारणों के चलते निष्क्रिय पड़ा हुआ था।

सरकारी अनुमान के अनुसार इस क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के तेल और गैस भंडार मौजूद हैं। उत्पादन शुरू होने के बाद वर्तमान 1,000 से 1,500 बैरल प्रतिदिन की क्षमता बढ़कर लगभग दस गुना तक पहुंच सकती है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

केंद्र सरकार का मानना है कि शांति और विकास के ये कदम पूर्वोत्तर भारत को देश की आर्थिक प्रगति में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार करेंगे।

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