इबोला के बढ़ते खतरे से अलर्ट मॉरीशस, यात्रियों पर लगाया सख्त प्रतिबंध

 पोर्ट लुई। अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस संक्रमण को देखते हुए मॉरीशस सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए कई सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं। सरकार ने उन विदेशी नागरिकों के देश में प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिन्होंने पिछले 21 दिनों के दौरान डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा या दक्षिण सूडान की यात्रा की है, वहां ठहरे हैं या इन देशों से होकर गुजरे हैं।

हालांकि मॉरीशस के नागरिकों के साथ-साथ वैध वर्क परमिट, रेजिडेंस परमिट, बिजनेस परमिट या स्टूडेंट परमिट रखने वाले विदेशी नागरिकों को देश में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। लेकिन यदि उन्होंने हाल के 21 दिनों में इन प्रभावित देशों का दौरा किया है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से 21 दिन के क्वारंटीन में रहना होगा।

मॉरीशस सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर विशेष स्वास्थ्य जांच और जोखिम मूल्यांकन किया जाएगा। यदि किसी यात्री में इबोला संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत आइसोलेशन में रखकर चिकित्सकीय जांच कराई जाएगी।

अफ्रीकन यूनियन और स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में फैला इबोला संक्रमण क्षेत्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसी कारण जुलाई में मॉरीशस में प्रस्तावित 18वें यूएस-अफ्रीका बिजनेस समिट को भी फिलहाल स्थगित करने का अनुरोध किया गया है।

गौरतलब है कि 15 मई को कांगो और युगांडा में इबोला प्रकोप की आधिकारिक पुष्टि हुई थी। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया। अफ्रीका सीडीसी और डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त रूप से जून से नवंबर तक इबोला नियंत्रण अभियान शुरू किया है, जिसके लिए 51.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अब तक 34 स्वास्थ्यकर्मी इबोला वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से सात की मौत हो गई है। सीमित चिकित्सा संसाधन, कमजोर स्वास्थ्य ढांचा, लोगों की आवाजाही और गलत सूचनाओं का प्रसार इस संक्रमण को नियंत्रित करने में बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।

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