देहरादून। उत्तराखंड राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री) भगवत प्रसाद मकवाना ने सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। विकास भवन सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के हितों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उनके उत्पीड़न के मामलों में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक के दौरान उपाध्यक्ष ने मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से मैला ढोने की प्रथा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एमएस अधिनियम-2013 के तहत इस अमानवीय प्रथा का पूर्ण उन्मूलन सरकार की प्राथमिकता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मैनुअल स्कैवेंजर्स का सर्वेक्षण नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने पुनः सर्वेक्षण कराने और चिन्हित लोगों के पुनर्वास के लिए ऋण, कौशल विकास प्रशिक्षण तथा स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।
मकवाना ने कहा कि ऐसे परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान कार्ड, पहचान पत्र और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने ‘नमस्ते योजना’ के तहत सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में लगे सफाई मित्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया। सभी कर्मचारियों को पीपीई किट और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने तथा सफाई कार्यों को पूरी तरह मशीनीकृत करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में उपाध्यक्ष ने उपनल के माध्यम से अस्पतालों, नगर निगमों और नगर पालिकाओं में कार्यरत उन सफाई कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन का लाभ देने की बात कही, जिन्होंने 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर ली है। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों की सूची 15 दिनों के भीतर आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इसके अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई, अवकाश और न्यूनतम वेतन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। दून मेडिकल कॉलेज में कार्यरत सफाई कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत न करने पर संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक के बाद विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भगवत प्रसाद मकवाना ने समाज कल्याण विभाग परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।