सिंघम’ की नई राह: BJP छोड़ क्षेत्रीय ‘मूवमेंट’ की ओर बढ़े अन्नामलाई
तमिलनाडु भाजपा प्रमुख अन्नामलाई का इस्तीफा : भाजपा प्रमुख नितिन नबीन ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने कहा है कि वह चुनाव लड़ेंगे, लेकिन इस अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है...
-ममता सिंह, नई दिल्ली।
तमिलनाडु की सियासत में ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर पूर्व आईपीएस अधिकारी और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष K. Annamalai का भगवा दल से आधिकारिक रूप से मोहभंग हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने की मुहर लगते ही दक्षिण भारत की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है।
दिल्ली में गृह मंत्री Amit Shah और संगठन महासचिव BL Santosh के साथ हुई मैराथन बैठकों और मनाने की तमाम कोशिशों के बावजूद अन्नामलाई अपने फैसले पर अड़े रहे। यह इस्तीफा महज एक नेता का पार्टी छोड़ना नहीं है, बल्कि यह भाजपा की पारंपरिक गठबंधन राजनीति के खिलाफ एक आक्रामक युवा नेतृत्व की बगावत का तीखा दस्तावेज है।
अन्नामलाई के इस अप्रत्याशित कदम की पटकथा वास्तव में तभी लिख दी गई थी जब साल 2025 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को कमान सौंपी गई थी। इसके बाद, आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा अन्नामलाई की मर्जी के खिलाफ जाकर अन्नाद्रमुक (AIADMK) के साथ दोबारा चुनावी समझौता करने के फैसले ने आग में घी का काम किया। अन्नामलाई हमेशा से तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के दोनों ध्रुवों (DMK और AIADMK) के खिलाफ भाजपा को एक स्वतंत्र और आक्रामक विकल्प के रूप में खड़ा करना चाहते थे।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में भाजपा का वोट शेयर 3 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत तक पहुंचा था, जिसने राज्य में तीसरे विकल्प की उम्मीद जगाई थी। लेकिन हालिया विधानसभा चुनावों में जब पार्टी AIADMK के साथ गठबंधन के बावजूद महज 3 फीसदी वोट शेयर पर सिमट गई, तो अन्नामलाई का यह भरोसा पक्का हो गया कि बैसाखियों के सहारे द्रविड़ राजनीति को नहीं जीता जा सकता।
अब कयास लगाए जा रहे हैं कि अभिनेता विजय के राजनीतिक उदय की तरह ही अन्नामलाई भी तमिलनाडु में एक नए क्षेत्रीय ‘पॉलिटिकल मूवमेंट’ की शुरुआत करने जा रहे हैं, जिसे भविष्य में एक क्षेत्रीय दल का रूप दिया जाएगा। कोयंबटूर और उसके आसपास उनके समर्थकों द्वारा लगाए जा रहे नए पोस्टर भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं। अन्नामलाई का मानना है कि केवल भाषा और पुरानी द्रविड़ विचारधारा पर केंद्रित राजनीति का दौर अब ढलान पर है और राज्य के युवाओं को एक नए विज़न की तलाश है।
बहरहाल, भाजपा से उनके अलग होने से तमिलनाडु में भगवा विस्तार के दावों को बड़ा झटका लगा है, वहीं राज्य की राजनीति अब द्विध्रुवीय से त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले की ओर बढ़ती दिख रही है।