भाषण-नारों से नहीं, वैचारिक जुड़ाव से से जीत निश्चित : नबीन

 भाजपा अध्यक्ष ने उत्तराखंड के तीन दिवसीय दौरे में ‘जनभागीदारी’ का दिया मंत्र

 चुनावी चक्रव्यूह भेदने को ‘बंगाल मॉडल’ अपनाने की बात कही

 कमजोर बूथों को मजबूत करने के लिए समर्पित टीमें बनाने का कड़ा निर्देश दिया गया

ममता सिंह।

देहरादून। उत्तराखंड के सियासी समर को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जमीनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरा इसी रणनीतिक तैयारी का अहम हिस्सा रहा। अपने इस प्रवास के दौरान उन्होंने प्रदेश के शीर्ष नेताओं, कोर कमेटी और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ गहन मंथन किया। नितिन नबीन ने साफ किया कि पारंपरिक चुनावी ढर्रे में अब बड़े बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को दो टूक शब्दों में ‘जनभागीदारी’ बढ़ाने और जनता से ‘गहरे वैचारिक रिश्ते’ स्थापित करने का मूल मंत्र दिया। उनका मुख्य जोर इस बात पर रहा कि मतदाताओं को महज चुनावी मौसम की वस्तु समझने की भूल न की जाए। जनता से सतत व्यावहारिक संपर्क ही संगठन को दीर्घकालिक मजबूती दे सकता है।

इस संगठनात्मक महामंथन में विपक्ष के खिलाफ एक लंबी और ठोस वैचारिक लड़ाई की रूपरेखा तैयार की गई। नितिन नबीन ने स्पष्ट किया कि आधुनिक दौर में केवल लोकलुभावन वादों, विज्ञापनों और चुनावी भाषणों के दम पर सियासी जंग नहीं जीती जा सकती। इसके लिए एक ऐसे समर्पित जनसमर्थन के निर्माण की आवश्यकता है जो पार्टी की विचारधारा को आत्मसात करे। उन्होंने इसके लिए पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया, जिसे भाजपा की वैचारिक प्रयोगशाला माना गया। बंगाल में पार्टी ने समर्थकों को सिर्फ रैलियों की भीड़ नहीं बनाया, बल्कि उनके भीतर यह भाव जगाया कि वे राष्ट्रहित की एक बड़ी वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं। यही प्रयोग अब उत्तराखंड की देवभूमि पर भी दोहराया जाएगा ताकि प्रत्येक कार्यकर्ता और समर्थक वैचारिक रूप से अभेद्य दीवार बन सके।

अपने इस दौरे के पहले दिन उन्होंने राज्य की ‘कोर कमेटी’ के साथ बेहद उच्च स्तरीय और गोपनीय बैठक की। इस बैठक में पिछले चुनावों के उन बूथों की सूची तैयार की गई जहां पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा था। उन्होंने इन कमजोर कड़ियों को मजबूत करने के लिए विशेष कार्यबल और समर्पित टीमें गठित करने के कड़े निर्देश दिए। दौरे के दूसरे दिन संगठनात्मक फेरबदल और आगामी चुनावी चुनौतियों पर पदाधिकारियों से सीधा संवाद हुआ। दो दिनों का यह सघन दौरा पूरा करने के बाद नितिन नबीन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लौट चुके हैं। दिल्ली वापस आते ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, जहां वे देश के आर्थिक परिदृश्य और युवाओं के लिए तकनीकी अवसरों पर मंथन कर रहे हैं। उत्तराखंड में उनके इस दौरे ने संगठन के भीतर एक नई ऊर्जा और कड़ा अनुशासन फूंकने का काम किया है।

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