भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। सप्ताह की शुरुआत जहां जबरदस्त तेजी और निवेशकों के उत्साह के साथ हुई, वहीं अंतिम कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते बाजार का रुख तेजी से बदला और शुरुआती बढ़त अंत तक टिक नहीं सकी।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों, अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीदों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स 1,073.61 अंकों की रिकॉर्ड बढ़त के साथ 76,488.96 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 312.40 अंक चढ़कर 24,031.70 के स्तर पर पहुंच गया। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।
हालांकि, यह सकारात्मक माहौल ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाया। मंगलवार से वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। विशेष रूप से ईरान से जुड़े घटनाक्रम और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने बाजार पर दबाव बनाया। मंगलवार को सेंसेक्स 479.26 अंक और निफ्टी 118 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। बुधवार को भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और दोनों प्रमुख सूचकांक मामूली कमजोरी के साथ बंद हुए।
गुरुवार को ईद के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहा। वहीं शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में बाजार में कुछ मजबूती दिखाई दी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ भारी बिकवाली हावी हो गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली और वैश्विक जोखिमों को देखते हुए शेयरों की बिक्री की, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,092.06 अंक टूटकर 74,775.74 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 359.41 अंक गिरकर 23,547.75 पर आ गया। इस दौरान निफ्टी ने कई महत्वपूर्ण समर्थन स्तर भी तोड़ दिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सतर्कता निकट भविष्य में भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।