गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुई विदाई, जानिए क्यों खास रहा जनरल अनिल चौहान का सैन्य सफर

नई दिल्ली। देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान शनिवार को चार दशक से अधिक लंबे और गौरवशाली सैन्य जीवन के बाद सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर नई दिल्ली में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया। यह समारोह उनके राष्ट्र और सशस्त्र बलों के प्रति उल्लेखनीय योगदान को समर्पित रहा।

सेवानिवृत्ति से पहले जनरल अनिल चौहान ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद आयोजित विशेष समारोह में तीनों सेनाओं के जवानों ने उन्हें औपचारिक सलामी दी और भावभीनी विदाई दी।

इस अवसर पर जनरल चौहान ने कहा कि तीनों सेनाओं की ओर से संयुक्त गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सैन्य सेवा से विदाई लेना उनके लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने अपने लंबे सैन्य जीवन के दौरान मिले सहयोग, विश्वास और समर्थन के लिए सशस्त्र बलों के सभी अधिकारियों, जवानों तथा देशवासियों का आभार व्यक्त किया।

जनरल अनिल चौहान वर्ष 1981 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। अपने करीब 45 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनेक रणनीतिक अभियानों में अहम भूमिका निभाई। उन्हें भारतीय सशस्त्र बलों में संयुक्तता, समन्वय और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने वाले प्रमुख सैन्य अधिकारियों में गिना जाता है।

उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए समय-समय पर कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से सम्मानित किया गया। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा पदक (UYSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना मेडल (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) सहित कई महत्वपूर्ण अलंकरण प्राप्त हुए।

जनरल अनिल चौहान की सेवानिवृत्ति भारतीय सशस्त्र बलों के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन मानी जा रही है। हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य सुधारों के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.