रुड़की में गंगनहर किनारे महापुरुषों और भगवानों की प्रतिमाओं को लेकर चल रहे विवाद पर पूर्व मेयर गौरव गोयल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में सभी प्रतिमाओं की स्थापना विधिक प्रक्रिया के तहत और सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों के आधार पर की गई थी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि नगर विधायक राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल दे रहे हैं।
पूर्व मेयर गौरव गोयल ने कहा कि शहीद चंद्रशेखर आजाद, संत रविदास, भगवान वाल्मीकि, भगवान परशुराम और कश्यप समाज सहित कई महापुरुषों की प्रतिमाएं लगाने के प्रस्ताव उनके कार्यकाल में विधिवत पारित हुए थे। उन्होंने कहा कि उस समय सिंचाई विभाग की ओर से भी किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी।
गौरव गोयल ने नगर विधायक पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे लंबे समय से एक ही राजनीतिक रणनीति अपनाते आ रहे हैं। उनके अनुसार पहले विभागों से नोटिस जारी कराए जाते हैं और बाद में जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए खुद को समाधानकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
उन्होंने हाल ही में स्वर्णकार समाज की प्रतिमा हटाने के मामले का भी जिक्र किया। गोयल का आरोप है कि अनुमति मिलने के बावजूद सिंचाई विभाग के जरिए बुलडोजर चलवाया गया और जब समाज के लोगों ने विरोध किया तो दोबारा मूर्ति स्थापना का श्रेय लेने की कोशिश की गई।
पूर्व मेयर ने यह भी कहा कि जब नगर विधायक पालिका अध्यक्ष थे, तब भी इसी तरह हाउस टैक्स बढ़ाकर जनता को परेशान किया गया था और बाद में राहत देकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया गया।
गौरव गोयल ने कहा कि अब नगर की जनता इन राजनीतिक हथकंडों को समझ चुकी है और आने वाले चुनाव में इसका जवाब देगी। उन्होंने विधायक से सर्वसमाज और नगरवासियों से माफी मांगने की भी मांग की।