चुनौतियों के बीच शुरू हुआ हज का मुकद्दस सफर
मक्का में जुटे दुनिया भर के करीब 15 लाख अकीदतमंद, कठिन परिस्थितियों के बीच आस्था का सबसे बड़ा समागम शुरू, तपते मौसम में छातों और पानी की फुहारों से मिल रही राहत, महंगी ईंधन कीमतों के बावजूद भारतीय जायरीनों की यात्रा सुचारू रूप से जारी, मंगलवार को अराफात के मैदान में जुटेगी हाजियों की भीड़, होगी विशेष इबादत...
मक्का (सऊदी अरब)। Islam के सबसे पवित्र और अनिवार्य पांच अरकानों में शामिल पवित्र हज यात्रा (Hajj Yatra) का सोमवार को औपचारिक रूप से आगाज़ हो गया। वैश्विक स्तर पर जारी War के बाद बने नाज़ुक संघर्ष विराम और क्षेत्रीय तनाव की अनिश्चितताओं के बीच, दुनिया भर से लाखों की तादाद में Muslim समुदाय के लोग सऊदी अरब के मक्का (Mecca )शहर पहुंच रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक सीमा पार से 15 लाख से अधिक विदेशी अकीदतमंद इस पाक सफर के लिए मक्का की सरजमीं पर कदम रख चुके हैं।
इस बार की यात्रा पर जहां एक तरफ युद्ध की चिंताओं का साया है, वहीं दूसरी तरफ Weather का कड़ा इम्तिहान भी है। मक्का में इस वक्त भीषण गर्मी का दौर है, जिससे निपटने के लिए तीर्थयात्रियों के हाथों में छाते और हाथ से चलने वाले छोटे पंखे साफ देखे जा सकते हैं। इस तपिश में राहत देने के लिए जगह-जगह स्वयंसेवक पानी की बोतलें तकसीम कर रहे हैं और बड़े-बड़े वाटर-कूलर पंखों से पानी की फुहारें छोड़ी जा रही हैं।
मिस्र से आईं एक जायरीन साम्या अब्दुल मोनीम ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे खुद को बेहद भाग्यशाली मानती हैं। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा अहसास है जिसे लफ्जों में बयां नहीं किया जा सकता। खुदा का शुक्र है कि मुझे इस मुकद्दस सफर का हिस्सा बनने की नेमत हासिल हुई।”
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर उस सक्षम और आर्थिक रूप से मजबूत मुसलमान के लिए जिंदगी में एक बार हज करना लाजिमी (जरूरी) माना गया है। भारतीय संदर्भ की बात करें तो भारत से भी बड़ी संख्या में मुस्लिम जायरीन इस यात्रा पर पहुंचे हैं। हालांकि, ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से इस बार भारतीय अकीदतमंदों के लिए यात्रा का खर्च थोड़ा बढ़ गया है, लेकिन इसके बावजूद तैयारियों और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
वर्तमान में सभी तीर्थयात्री मक्का में पवित्र काबा की परिक्रमा (तवाफ) पूरी कर रहे हैं, जिसके बाद वे तंबुओं के ऐतिहासिक शहर ‘मीना’ की ओर रुख करेंगे। मंगलवार को इस यात्रा का सबसे मुकद्दस और अहम पड़ाव होगा, जब सभी जायरीन अराफात के मैदान में जमा होकर खुदा की बारगाह में इबादत करेंगे और अपनी खताओं की माफी मांगते हुए दुआएं मांगेंगे।