असम में UCC विधेयक पेश: बहुविवाह पर रोक, Live-In पंजीकरण अनिवार्य

विपक्षी विरोध के बीच असम में यूसीसी पेश, जनजातियों को मिली छूट : उत्तराखंड की तर्ज पर असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश, पंजीकरण न कराने पर जुर्माने का प्रावधान, जनजातीय आबादी को कानून से पूरी छूट…

गुवाहाटी। असम सरकार ने राज्य में ऐतिहासिक सामाजिक-कानूनी सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘असम समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026’ विधानसभा में पेश कर दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा द्वारा पेश किए गए इस मसौदे में उत्तराखंड मॉडल की तर्ज पर कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गुजारा भत्ता जैसे नागरिक कानूनों को एक समान और सुसंगत बनाना है।

इस विधेयक के सबसे चर्चित प्रावधान सह-जीवनसाथी (लिव-इन रिलेशनशिप) और बहुविवाह से जुड़े हैं। राज्य में अब एक से अधिक विवाह करने पर पूरी तरह प्रतिबंध होगा। इसके अलावा, लिव-इन संबंधों को एक महीने के भीतर जिला रजिस्ट्रार के पास पंजीकृत कराना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रामाणिक कानूनी स्रोतों के अनुसार, यदि कोई जोड़ा लिव-इन का पंजीकरण नहीं कराता है, तो उन्हें तीन महीने तक की जेल, ₹10,000 का जुर्माना या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। इसके अतिरिक्त, इस संबंध से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें संपत्ति में समान उत्तराधिकार मिलेगा।

विधेयक के अनुसार, विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष होना अनिवार्य है। उत्तराधिकार नियमों के तहत, माता-पिता की संपत्ति में बेटों और बेटियों को बराबर का हकदार माना गया है। हालांकि, पूर्वोत्तर की अनूठी जनसांख्यिकी और संवैधानिक सुरक्षा (छठी अनुसूची) का सम्मान करते हुए, राज्य की सभी अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

दूसरी ओर, विपक्ष ने सदन में इस बिल का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस, एआईयूडीएफ और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताते हुए मांग की है कि इसे व्यापक विचार-विमर्श के लिए विधानसभा की प्रवर समिति (Select Committee) के पास भेजा जाना चाहिए।

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