भारत में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे लाखों छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एमबीबीएस कोर्स से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए डिग्री पूरी करने की अधिकतम समय-सीमा 9 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी है। यह नया नियम इसी शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही देशभर के मेडिकल कॉलेजों में लगभग 11 हजार नई एमबीबीएस सीटें भी जोड़ी जा रही हैं, जिससे मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार देखने को मिलेगा।
सरकार के इस फैसले से उन छात्रों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी जो किसी कारणवश परीक्षा में असफल हो जाते हैं या पढ़ाई पूरी करने में अतिरिक्त समय लग जाता है। अब तक छात्रों को साढ़े पांच साल के एमबीबीएस कोर्स और एक साल की रोटेटिंग इंटर्नशिप सहित कुल 9 साल के भीतर डिग्री पूरी करनी होती थी। यानी अतिरिक्त अटेम्प्ट के लिए उनके पास केवल साढ़े तीन साल का समय होता था। नए नियम लागू होने के बाद अब छात्र कुल 10 साल में एमबीबीएस कोर्स पूरा कर सकेंगे और उन्हें अतिरिक्त प्रयासों के लिए लगभग साढ़े चार साल का समय मिलेगा।
बताया जा रहा है कि स्नातक चिकित्सा शिक्षा नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और इसे वर्तमान सत्र से लागू किया जाएगा। इस फैसले से उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी जो पढ़ाई के दौरान किसी व्यक्तिगत, स्वास्थ्य या शैक्षणिक कारणों से पिछड़ जाते हैं।
इसी के साथ मेडिकल सीटों की संख्या में भी बड़ा इजाफा किया जा रहा है। अप्रैल में सरकार ने करीब 11 हजार नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी थी। इसके बाद देश में कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 1.18 लाख से बढ़कर करीब 1.29 लाख हो जाएगी। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में जोड़ी गई हैं।
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के तहत होने वाली नीट 2026 काउंसलिंग में इन अतिरिक्त सीटों का सीधा असर दिखाई देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हजारों छात्रों का डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो सकेगा और मेडिकल शिक्षा में प्रतिस्पर्धा का दबाव भी कुछ हद तक कम होगा।