पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ रहस्यमयी तरीके से हो रही हत्याओं ने वहां की सुरक्षा एजेंसियों और आतंकी संगठनों में खलबली मचा दी है। बीते एक साल के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के कई बड़े कमांडर, कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े चेहरे और आईएसआई के अंडरकवर एजेंट अज्ञात हमलावरों के निशाने पर आए हैं। हाल ही में अल-बद्र कमांडर बुरहान हमजा की मौत के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
मई 2025 में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर मीर शुक्र खान का शव पाकिस्तान के क्वेटा में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। वह युवाओं की भर्ती और कट्टरपंथी सोच फैलाने में सक्रिय माना जाता था। इसी महीने सिंध प्रांत में लश्कर कमांडर सैफुल्लाह खालिद की भी अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी।
अप्रैल 2025 में खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर कमांडर शेख यूसुफ अफ्रीदी को गोली मार दी गई थी। बताया गया कि हमलावरों ने उस पर कई राउंड फायर किए। वहीं मार्च 2025 में लश्कर के मुख्यालय मुरीदके के पास आतंकी बिलाल आरिफ सराफी को नमाज के बाद चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया गया।
इसी दौरान भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल कई अन्य चेहरे भी निशाने पर आए। हाफिज सईद का करीबी और रियासी हमले का आरोपी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी सिंध प्रांत में मारा गया। मार्च में ही आईएसआई का कथित अंडरकवर एजेंट मुफ्ती शाह बलूचिस्तान में मारा गया था।
फरवरी 2025 में भी दो बड़ी घटनाएं सामने आईं। हाफिज सईद के करीबी मौलाना काशिफ अली की हत्या कर दी गई, जबकि मौलाना हमीदुल हक हक्कानी फिदायीन हमले में मारे गए।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों को इससे बड़ा झटका लगा है और पाकिस्तान के भीतर भय का माहौल बन गया है।