अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा Milky Way में जमी हुई बर्फ के विशाल भंडार का पता लगाया है, जो अंतरिक्ष में जीवन की उत्पत्ति को समझने में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह बर्फ पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे रसायनों का मिश्रण है, जो सूक्ष्म धूल कणों पर जमा है।
इस अहम खोज का श्रेय SPHEREx नामक स्पेस टेलिस्कोप को जाता है, जिसे 11 मार्च 2025 को लॉन्च किया गया था। यह टेलिस्कोप इंफ्रारेड तकनीक के जरिए पूरे आकाश को स्कैन करता है और दूर-दराज के क्षेत्रों में मौजूद रसायनों की पहचान करता है। खास बात यह है कि इसने पहली बार इतने बड़े स्तर पर बर्फीले क्षेत्रों का 3डी मैप तैयार किया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बर्फ विशाल आणविक बादलों में मौजूद धूल कणों पर जमी होती है। ये कण आकार में बेहद छोटे होते हैं, लेकिन इन पर जमी बर्फ की मोटी परतें अंतरिक्ष में “इंटरस्टेलर ग्लेशियर” जैसा काम करती हैं। मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि जब नए सौर मंडल बनते हैं, तो यही बर्फ उनके लिए पानी का प्रमुख स्रोत बन सकती है।
इस खोज से यह भी संकेत मिलता है कि पृथ्वी के महासागरों का पानी अरबों साल पहले इन्हीं अंतरिक्षीय भंडारों से आया हो सकता है। इससे यह सिद्ध होता है कि जीवन के लिए जरूरी तत्व ब्रह्मांड में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं, न कि कोई संयोग।
पहले James Webb Space Telescope और Spitzer Space Telescope जैसे टेलिस्कोप सीमित क्षेत्रों का अध्ययन करते थे, लेकिन SPHEREx ने पूरी आकाशगंगा का व्यापक नक्शा तैयार कर नई दिशा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन भविष्य में उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करेगा, जहां पृथ्वी जैसे जलयुक्त ग्रह बनने की संभावना अधिक है। यह खोज आने वाले समय में जीवन की तलाश को नई गति दे सकती है।