देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के प्रभाव के बीच बिजली की मांग में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसी को देखते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में राज्य में विद्युत आपूर्ति की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी मई और जून माह में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त विद्युत प्रबंधन के ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संभावित मांग को देखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से ही सुनिश्चित की जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें।
बैठक के दौरान यूपीसीएल (उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें राज्य की वर्तमान विद्युत स्थिति की जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि देशभर में हीटवेव के चलते बिजली की मांग में अचानक वृद्धि हुई है।
समीक्षा में यह भी सामने आया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस की सीमित उपलब्धता से राज्य के गैस आधारित बिजली संयंत्रों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा नदियों में जल स्तर में कमी के चलते जल विद्युत उत्पादन में भी गिरावट आई है।
चालू वित्तीय वर्ष में बिजली की मांग में औसतन लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा इंडक्शन कुकर और अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते उपयोग से अतिरिक्त 50 से 100 मेगावाट तक का लोड सिस्टम पर बढ़ गया है। इससे पीक डिमांड के समय बिजली आपूर्ति पर दबाव और अधिक बढ़ रहा है।
सरकार ने इन परिस्थितियों को देखते हुए बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए अग्रिम रणनीति तैयार करने पर जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वैकल्पिक स्रोतों और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखा जाए, ताकि गर्मी के मौसम में लोगों को निर्बाध बिजली मिल सके।