विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक व्यापक और सुदृढ़ अभियान चलाया गया। चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी 13 जनपदों में जागरूकता और रोकथाम से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया गया। वर्ष 2026 की वैश्विक थीम “Driven to End Malaria: Now We Can: Now We Must” के अनुरूप राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक उत्तराखण्ड को पूर्णतः मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य दोहराया।
तेजी से घटे मरीज, मजबूत हुई रणनीति
राज्य में पिछले एक दशक में मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2025 तक मलेरिया रोगियों की संख्या में 95.73% की कमी आई है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि वर्तमान में राज्य में मलेरिया से एक भी मृत्यु दर्ज नहीं हुई है। पहाड़ी जिलों में मलेरिया लगभग समाप्त हो चुका है, जबकि अब यह बीमारी केवल तराई के कुछ सीमित क्षेत्रों तक सिमट कर रह गई है।
निदान और उपचार पर विशेष फोकस
मलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत राज्य में त्वरित निदान और प्रभावी उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए रक्त स्लाइड माइक्रोस्कोपी जांच, बाइवेलेंट रैपिड डायग्नोस्टिक किट (RDT) और ACT (Artemisinin-based combination therapy) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क जांच और दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे समय रहते मरीजों का उपचार संभव हो सके।
तराई क्षेत्रों में सख्त निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से तराई और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को और मजबूत किया है। ब्लॉक स्तर तक सर्विलांस सिस्टम को सक्रिय किया गया है, जिससे किसी भी संभावित मलेरिया प्रकोप की तुरंत पहचान कर उसे नियंत्रित किया जा सके। विभागीय टीमें लगातार फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा ले रही हैं।