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असम में रिकॉर्ड मतदान का संकेत क्या? सत्ता वापसी या बदलाव की आहट!

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Assam में 9 अप्रैल 2026 को हुए विधानसभा चुनाव ने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। इस बार 85.96 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज हुआ, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों के लिए उम्मीदों और आशंकाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।

राज्य की 126 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में करीब 2.5 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिला और पहली बार वोट देने वाले युवा शामिल रहे। अब सभी की नजरें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इतना अधिक मतदान कई संकेत देता है। एक वर्ग इसे सत्ता के पक्ष में सकारात्मक माहौल मान रहा है। उनका तर्क है कि Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में सुरक्षा, विकास योजनाओं और कल्याणकारी नीतियों ने मतदाताओं का भरोसा जीता है। इसके साथ ही Narendra Modi और Amit Shah जैसे नेताओं के प्रचार ने भी मतदान प्रतिशत बढ़ाने में भूमिका निभाई।

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वहीं दूसरा वर्ग इस उच्च मतदान को सत्ता विरोधी लहर के रूप में देख रहा है। विपक्ष का मानना है कि बेरोजगारी, अल्पसंख्यक मुद्दे और भ्रष्टाचार जैसे विषयों को लेकर जनता में असंतोष है, जो अधिक मतदान के रूप में सामने आया है।

इस चुनाव में महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही, जिसने सामाजिक बदलाव और सरकारी योजनाओं के प्रभाव को दर्शाया। साथ ही, मतदाता सूची की सफाई और जागरूकता अभियानों ने भी मतदान प्रतिशत बढ़ाने में योगदान दिया।

राजनीतिक माहौल को और गर्म करने में आरोप-प्रत्यारोप और संवेदनशील मुद्दों ने भी भूमिका निभाई। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में शालीन चुनाव प्रचार भी देखने को मिला, जो लोकतंत्र के सकारात्मक पक्ष को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, असम का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन या निरंतरता का नहीं, बल्कि विकास बनाम असंतोष की सीधी टक्कर बन गया है। अब अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही सामने आएगा कि रिकॉर्ड मतदान किसके पक्ष में गया।

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