उत्तराखंड में खेल जगत से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहां उभरते खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों ने राज्य की टेबल टेनिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया को भेजे गए एक शिकायत पत्र में उत्तराखंड टेबल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव पर पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि एसोसिएशन के पदाधिकारी सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की अनदेखी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चयन और अवसर देने में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के खिलाड़ियों को उचित मंच नहीं मिल पा रहा है।
इस मामले को लेकर खिलाड़ियों और अभिभावकों ने देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की। प्रेस वार्ता के दौरान आरोप लगाया गया कि एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारी केवल बड़े शहरों की महंगी टेबल टेनिस अकादमियों और अपने परिचित खिलाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्रेस वार्ता में मौजूद लोगों ने कहा कि इससे प्रतिभाशाली लेकिन संसाधनों से वंचित खिलाड़ी हतोत्साहित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए, ताकि हर खिलाड़ी को समान अवसर मिल सके।
इस दौरान कोच विजय कुमार समेत कई अभिभावकों—पुष्पा देवी, रविंद्रि देवी और अन्य ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया, तो इससे राज्य के खेल प्रतिभाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
खिलाड़ियों और अभिभावकों ने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी के साथ अन्याय न हो और खेल का स्वस्थ वातावरण बना रहे।