ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद क्यों तेज हुई भारत की कूटनीति, जानिए बड़ी रणनीति

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच हुए सीजफायर के बाद भारत की कूटनीति लगातार सक्रिय और प्रभावशाली रूप में सामने आ रही है। नई दिल्ली से लेकर पश्चिम एशिया, अमेरिका और हिंद महासागर क्षेत्र तक भारत की रणनीतिक गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि अब भारत केवल वैश्विक घटनाओं का दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने वाला देश बन चुका है।

विदेश मंत्री S. Jaishankar की मॉरिशस यात्रा भारत की समुद्री और सामरिक नीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। पोर्ट लुईस में उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग का महत्व बढ़ गया है। भारत और Mauritius के बीच तेल-गैस आपूर्ति समझौता अंतिम चरण में है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी।

इसके साथ ही जयशंकर की United Arab Emirates यात्रा भी बेहद महत्वपूर्ण रही। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत तेल और गैस आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में सक्रिय है। दूसरी ओर विदेश सचिव विक्रम मिसरी की United States यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई दे रही है। वहां उनकी मुलाकात वरिष्ठ अधिकारियों से हुई, जिसमें व्यापार, रक्षा, क्वांटम तकनीक, एआई, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा हुई।

मिसरी ने एफबीआई निदेशक Kash Patel से भी मुलाकात की, जिसमें आतंकवाद, संगठित अपराध और नशीले पदार्थों की रोकथाम पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। वहीं केंद्रीय मंत्री Hardeep Singh Puri की Qatar यात्रा भारत की ऊर्जा कूटनीति का अहम हिस्सा है, जहां एलएनजी आपूर्ति स्थिर रखने पर चर्चा हुई।

इन सभी प्रयासों से साफ है कि भारत हिंद महासागर, पश्चिम एशिया और अमेरिका के साथ बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत अब वैश्विक संतुलन तय करने वाली शक्ति बनकर उभर रहा है।

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