रानीखेत। भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा में तैनात Sashastra Seema Bal (एसएसबी) के जवान जल्द ही एक रोमांचक और चुनौतीपूर्ण वॉटर राफ्टिंग अभियान में हिस्सा लेने जा रहे हैं। एसएसबी सीमान्त मुख्यालय गनियाद्योली (रानीखेत) के तत्वावधान में 16 से 19 मार्च तक महाकाली नदी के जलमार्ग पर चार दिवसीय अंतर-सीमांत व्हाइट वॉटर राफ्टिंग अभियान ‘तरणी’ आयोजित किया जाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य जवानों की परिचालन क्षमता को मजबूत करना और उन्हें आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव कार्यों के लिए और अधिक दक्ष बनाना है। इस रोमांचक अभियान में बल के छह अलग-अलग सीमांतों से कुल 36 अधिकारी और कार्मिक हिस्सा लेंगे।
एसएसबी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार यह अभियान 16 मार्च की सुबह जौलजीबी स्थित सीमा चौकी से शुरू होगा। अभियान के दौरान राफ्टिंग दल जौलजीबी से लेकर बूम तक लगभग 150 किलोमीटर का लंबा और चुनौतीपूर्ण जलमार्ग तय करेगा। यह पूरा अभियान महाकाली नदी के तेज बहाव और कठिन जलधाराओं के बीच आयोजित किया जाएगा।
अभियान का आयोजन एसएसबी की 55वीं वाहिनी, पिथौरागढ़ द्वारा किया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस अभियान में भाग लेने वाले जवानों को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। खास तौर पर नदी में आने वाले खतरनाक ‘रैपिड्स’ उनके साहस, कौशल और प्रशिक्षण की कड़ी परीक्षा लेंगे।
अभियान के दौरान ‘चुका’ जैसे खतरनाक रैपिड्स को पार करना दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इन कठिन जलधाराओं को पार करते हुए जवान अपने ‘स्विफ्ट वॉटर रेस्क्यू’ कौशल का प्रदर्शन करेंगे। इससे उन्हें प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़ या नदी से जुड़े हादसों के दौरान राहत और बचाव कार्यों में तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
एसएसबी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे साहसिक अभियानों से जवानों की शारीरिक क्षमता, टीम वर्क और आपदा प्रबंधन कौशल को मजबूत करने में मदद मिलती है। साथ ही यह प्रशिक्षण उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करता है।