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अमित शाह की लोकतंत्र बचाओ यात्रा पर कांग्रेस का हमला, गरिमा दसौनी ने पूछे सवाल

देहरादून। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छह नवंबर को देहरादून आगमन और परेड ग्राउंड से प्रस्तावित लोकतंत्र बचाओ यात्रा को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि लोकतंत्र की हत्या करने वाले आज लोकतंत्र बचाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अमित शाह किससे लोकतंत्र बचाने के लिए यात्रा निकाल रहे हैं?

गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि वर्ष 2016 में उत्तराखंड में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व वाली निर्वाचित सरकार को गिराने के लिए राजनीतिक जोड़तोड़, विधायकों की खरीद-फरोख्त और दलबदल को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे। कांग्रेस का आरोप रहा है कि केंद्र की तत्कालीन भाजपा सरकार ने उत्तराखंड की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया। इसके बाद भी विभिन्न राज्यों में निर्वाचित सरकारों को दलबदल के जरिए अस्थिर करने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में अमित शाह के नेतृत्व में लोकतंत्र बचाओ यात्रा निकालना राजनीतिक विरोधाभास है।

उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के 25 हजार लोगों के पदयात्रा में शामिल होने के दावे पर भी सवाल उठाए। कहा कि भीड़ जुटाने से लोकतंत्र की रक्षा नहीं होती। इसके लिए संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता, जनादेश का सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा जरूरी है।

धनतेरस पर आयोजन से कारोबार प्रभावित होने की आशंका

कांग्रेस प्रवक्ता ने छह नवंबर को धनतेरस के दिन प्रस्तावित कार्यक्रम पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धनतेरस का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन बाजारों में बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में शहर के बीचोंबीच बड़े राजनीतिक आयोजन और पदयात्रा से यातायात बाधित होने के साथ ही बाजारों तक लोगों की पहुंच प्रभावित हो सकती है। इससे व्यापारियों के कारोबार को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने सवाल किया कि आम जनता, व्यापारियों और श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

भाजपा सरकार से मांगा विकास का हिसाब

दसौनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड को डबल इंजन सरकार के जरिए विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का भरोसा दिया था। प्रदेश की जनता ने भाजपा को दो बार प्रचंड बहुमत दिया और पांचों लोकसभा सीटों पर भी लगातार समर्थन दिया। इसके बावजूद बेरोजगारी, महिला अपराध, भर्ती घोटाले, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे लगातार सवालों के घेरे में हैं।

उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज भी परिवार और प्रदेश की जनता न्याय की मांग कर रही है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और स्थायी समाधान की जरूरत बनी हुई है। वहीं, ग्रीन बोनस, विशेष औद्योगिक पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे की बहाली जैसी मांगों पर भी केंद्र सरकार से ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं।

दसौनी ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में युवाओं, महिलाओं, किसानों, व्यापारियों और आपदा प्रभावितों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उत्तराखंड को देश का नंबर वन राज्य बनाने के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।

अंत में उन्होंने कहा कि अमित शाह को लोकतंत्र बचाओ यात्रा निकालने से पहले उत्तराखंड की जनता को दिए गए वादों का हिसाब देना चाहिए। लोकतंत्र नारों, यात्राओं और भीड़ से नहीं, बल्कि जनता के जनादेश, संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के सम्मान से सुरक्षित रहता है। प्रदेश की जनता अब नारों के बजाय अपने सवालों के जवाब और सरकार के कामकाज का हिसाब चाहती है।

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