नैनीताल। उत्तराखंड के काशीपुर शहर में पांच स्थानों पर कथित तौर पर नियमों के विरुद्ध स्ट्रीट वेंडिंग जोन बनाए जाने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। साथ ही नगर निगम के म्यूनिसिपल कमिश्नर को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए प्रत्यावेदन पर सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कानून के अनुसार छह सप्ताह के भीतर निर्णय लें।
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।
रिहायशी इलाकों में वेंडिंग जोन बनाने पर आपत्ति
मामले के अनुसार, काशीपुर निवासी अतुल कुमार यादव सहित अन्य लोगों ने जनहित याचिका दायर कर नगर निगम की ओर से पांच स्थानों पर वेंडिंग जोन के लिए जगह चिन्हित किए जाने पर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ये स्थान रिहायशी इलाकों में हैं और यहां की सड़कें भी काफी संकरी हैं।
याचिका में बताया गया कि संबंधित स्थानों पर करीब 28 फीट चौड़ी सड़क होने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। वेंडिंग जोन बनने से यातायात का दबाव बढ़ने और जाम की समस्या पैदा होने की आशंका जताई गई।
नहर के ऊपर वेंडिंग जोन बनाने पर भी सवाल
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित वेंडिंग जोन में एक स्थान ऐसा भी है, जहां नहर के ऊपर बनी सड़क पर निर्माण और वेंडिंग जोन स्थापित करने को लेकर पहले से हाई कोर्ट का आदेश मौजूद है। इसके बावजूद वहां वेंडिंग जोन निर्धारित किए जाने पर आपत्ति जताई गई।
याचिका में यह भी कहा गया कि गलियों और सड़कों के किनारे वेंडिंग जोन बनाना संबंधित नियमों के अनुरूप नहीं है। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हो सकती है।
ध्वनि प्रदूषण और कानून व्यवस्था को लेकर चिंता
याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से ध्वनि प्रदूषण, यातायात बाधित होने और कानून व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उनका कहना था कि इससे स्थानीय निवासियों की दिनचर्या प्रभावित होगी और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जनहित याचिका में गलियों, सड़कों और नहर के ऊपर घोषित वेंडिंग जोन पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
हाई कोर्ट ने मामले में सीधे अंतिम फैसला देने के बजाय संबंधित अधिकारियों को प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अब नगर निगम के म्यूनिसिपल कमिश्नर को सभी पक्षों को सुनकर छह सप्ताह के भीतर इस मामले का निस्तारण करना होगा।
