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जनजातीय गौरव दिवस पर उत्तराखंड में होंगे विशेष आयोजन, मंत्री खजानदास ने अधिकारियों को दिए निर्देश

 देहरादून। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस के तहत उत्तराखंड में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में एक से 18 नवंबर 2026 तक प्रस्तावित आयोजनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री खजानदास ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में मंत्री खजानदास ने अधिकारियों से कहा कि भारत सरकार की ओर से तय कार्यक्रमों के अनुरूप प्रदेशभर में आयोजन की तैयारियां की जाएं। जनजातीय क्षेत्रों में होने वाले कार्यक्रमों के संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर विभागीय स्तर पर समन्वय बनाए रखा जाए, ताकि निर्धारित समय पर सभी गतिविधियां आयोजित की जा सकें।

भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को किया जाएगा याद

जनजातीय गौरव दिवस भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज के अधिकारों, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण संघर्ष किया था। उनका जीवन और योगदान जनजातीय समुदायों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को पहचान देना है। इसके साथ ही जनजातीय समुदायों से जुड़े विषयों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके विकास से संबंधित प्रयासों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जाता है।

समाज कल्याण विभाग को दिए आवश्यक निर्देश

बैठक में समाज कल्याण विभाग के सचिव श्रीधर बाबू अदांकी, अपर सचिव विक्रम सिंह यादव और जनजाति निदेशक संजय टोलिया सहित विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार आयोजन की रूपरेखा पर चर्चा की गई।

मंत्री खजानदास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रमों की तैयारियों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जाएं। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में इन आयोजनों को प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के लिए विभागीय स्तर पर जरूरी कदम उठाए जाएं।

जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर प्रस्तावित कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा के विचारों और योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के साथ जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास किया जाएगा।

 

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