जिलाधिकारी ने कहा कि ईवीएम की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। इसमें मशीनों के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की तकनीकी जांच की जाएगी, ताकि उनके सुचारु और त्रुटिरहित संचालन को सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही डेटा रिकॉर्डिंग की विश्वसनीयता की भी जांच होगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य ईवीएम की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के साथ निर्वाचन व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से जांच प्रक्रिया के प्रति विश्वास मजबूत होगा।
डीएम ने बताया कि एफएलसी पूरी होने के बाद ईवीएम का विधानसभा क्षेत्रवार रेंडमाइजेशन किया जाएगा। इसके बाद प्रेक्षक की उपस्थिति में सॉफ्टवेयर के माध्यम से मशीनों का दोबारा रेंडमाइजेशन कर उन्हें अलग-अलग मतदान केंद्रों के लिए आवंटित किया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत मशीनों का आवंटन निर्धारित निर्वाचन प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखना और किसी भी तरह की आशंका को दूर करना है।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से 23 अक्टूबर से शुरू होने वाली एफएलसी प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से भाग लेने और जांच का अवलोकन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निर्वाचन संबंधी सभी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और निर्धारित नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, तहसीलदार सदर सुरेंद्र सिंह देव और जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र देवली सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें भाजपा के अरविंद जैन, कांग्रेस के जसविंदर सिंह और सुनील जायसवाल, सीपीआई (एम) के अनंत आकाश, बसपा के सत्यपाल तथा आम आदमी पार्टी के कमल राणा शामिल थे।
