वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के निर्देश पर साइबर हेल्पलाइन 1930 का कंट्रोल रूम संबंधित बैंकों और नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। शिकायत मिलते ही ठगी की रकम को होल्ड कराने का प्रयास किया जाता है, जिससे पीड़ितों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
एसटीएफ के मुताबिक, ऋषिकेश निवासी काश्मी शर्मा से एपीके फाइल के जरिए 1.54 लाख रुपये की ठगी हुई, जिसमें 1,10,360 रुपये होल्ड कराए गए। रामनगर निवासी रितेश कुमार की 81,998 रुपये और पंतनगर निवासी देव सिंह की 66,409 रुपये की पूरी रकम सुरक्षित कराई गई।
इसी तरह बनभूलपुरा निवासी मुजीरबुर्रहमान के 1.58 लाख रुपये, देहरादून के पटेलनगर निवासी इरशाद के 5.64 लाख रुपये और खटीमा निवासी विवेक सिंह राणा के 1.32 लाख रुपये होल्ड कराए गए। कालाढूंगी निवासी किशन नाथ की 51,070 रुपये की पूरी धनराशि भी सुरक्षित कराई गई।
रामनगर निवासी नवीन चंद्र पांडे फेसबुक अपडेट नोटिफिकेशन लिंक के जरिए ठगी के शिकार हुए। उनकी शिकायत पर 2.25 लाख रुपये से अधिक की रकम होल्ड कराई गई। वहीं, देहरादून निवासी मनोज नौटियाल के मामले में 3.88 लाख रुपये और काशीपुर निवासी आदेश गुप्ता की शिकायत पर 6.30 लाख रुपये होल्ड कराए गए।
एसटीएफ प्रमुख ने लोगों को बैंक खाते, एटीएम कार्ड, ओटीपी, पिन और यूपीआई पिन की जानकारी किसी से साझा नहीं करने की सलाह दी है। कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना भी अपराध है।
पुलिस ने फर्जी कस्टमर केयर नंबर, निवेश में रकम दोगुनी करने के प्रलोभन और डिजिटल अरेस्ट की धमकी से सतर्क रहने को कहा है। एसटीएफ ने स्पष्ट किया कि कोई भी जांच एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करती।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम होल्ड कराने की संभावना बढ़ सकती है।
