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दुनिया संकट में, भारत के पास है अलग सोच: पीएम मोदी ने बताया ‘पावर टू एंपावर’ का मंत्र

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते संकटों के बीच भारत ‘पावर टू एंपावर’ यानी अपनी शक्ति से दूसरों को सशक्त बनाने की सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक सहयोग, भरोसे और जनकल्याण का माध्यम बन रहा है। डिजिटल तकनीक, लोकतांत्रिक संवाद और नवाचार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमिक फोरम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारत में पहली बार आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम के लिए ब्लूमबर्ग और उसकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस मंच पर तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो रही है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच सहयोग पर जोर

मोदी ने कहा कि जिन व्यवस्थाओं ने दुनिया को आपस में जोड़ा था, उनका इस्तेमाल अब दबाव बनाने और प्रभुत्व स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा, खनिज और तकनीक जैसे क्षेत्र भी इसके उदाहरण हैं। ऐसे समय में दुनिया को भरोसे और सहयोग पर आधारित व्यवस्था की जरूरत है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, बिग कैट एलायंस, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे और मिशन लाइफ जैसी पहलों का उल्लेख किया।

डिजिटल तकनीक से मजबूत हो रहा लोकतंत्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि डेटा, ज्ञान और नवाचार आज शक्ति के प्रमुख स्रोत हैं। इनका इस्तेमाल लोगों को सशक्त बनाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने भारत की भाषाई और मीडिया विविधता का जिक्र करते हुए बताया कि देश में 100 से अधिक भाषाएं, 80 हजार से अधिक समाचार पत्र और प्रकाशन तथा एक हजार से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल हैं।

उन्होंने डिजिटल मंचों को लोकतांत्रिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया और विदेशी मेहमानों से भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को समझने तथा आजमाने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, यूपीआई जैसी व्यवस्था सड़क किनारे सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े शोरूम तक को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ती है।

2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप का उल्लेख

मोदी ने कहा कि 2014 से पहले देश में स्टार्टअप की संख्या सीमित थी, जबकि अब इनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने इसे देश में बढ़ते नवाचार और प्रतिभाओं के अवसरों से जोड़ा।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि देश में सुधारों की प्रक्रिया दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है।

 

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