नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार किए गए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तीन नेताओं और पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह को रिहा करने का आदेश दिया गया है। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने यह आदेश जारी किया। हालांकि, रिहाई के साथ एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त भी रखी गई है।
जानकारी के अनुसार, सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका 10 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए विमान से आ रहे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत की थी। पुलिस को आशंका थी कि उनके प्रदर्शन में शामिल होने से शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
वहीं, पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह को भी 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए निकलते समय उनके घर के पास से गिरफ्तार किया गया था। बाद में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने चारों को रिहा करने का आदेश दिया।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर था प्रदर्शन
दरअसल, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया गया था। कॉकरोच जनता पार्टी के साथ कई छात्र-युवा संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इस प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की थी।
प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा कथित वोट चोरी का मामला था। आयोजकों की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई जानी थी। इसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सीजेपी के नेता दिल्ली पहुंच रहे थे।
हालांकि, प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई करते हुए पार्टी के नेताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मामला चर्चा में आ गया था। अब मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद चारों को रिहाई मिल गई है। एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त के तहत उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया है।
