राज्यपाल ने कहा कि तकनीक का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दूरस्थ गांवों तक भी पहुंचना चाहिए। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में एआई का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और प्रशासन को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। तकनीक तभी सार्थक है, जब वह आम लोगों का जीवन आसान बनाए और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान उपलब्ध कराए।
उन्होंने युवाओं से नए विचारों पर काम करने और किसानों, सैनिकों, विद्यार्थियों तथा ग्रामीण समुदायों की समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी नवाचार करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए सीखने, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है।
राज्यपाल ने तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय मूल्यों, अनुशासन और अच्छे चरित्र को बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई मानवीय बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि क्षमताओं को बढ़ाने का माध्यम है। डीपफेक, भ्रामक सूचनाओं और निजी जानकारी के दुरुपयोग जैसी चुनौतियों को देखते हुए तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में तीन प्रमुख विषयों पर पैनल चर्चाएं हुईं। पहली चर्चा में एआई, रक्षा, उभरती तकनीकों और हिमालयी सुरक्षा पर विचार रखे गए। दूसरी परिचर्चा में उच्च शिक्षा को तकनीक के अनुरूप विकसित करने और युवाओं को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया। तीसरे सत्र में रचनात्मक उद्योग, स्टार्टअप, उद्यमिता और एआई आधारित अर्थव्यवस्था में उभरते अवसरों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, रक्षा विशेषज्ञों, कलाकारों, उद्यमियों और विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। ‘उत्तराखंड डीप-टेक 2030’ का उद्देश्य तकनीक और नवाचार को पहाड़ की जरूरतों से जोड़कर राज्य में विकास तथा रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
