देहरादून। उत्तराखंड में आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को दुरुस्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग को 461.87 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत है। लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने विभागीय अधिकारियों को सड़क और पुल निर्माण में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खराब गुणवत्ता मिलने पर संबंधित अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की जवाबदेही तय करने को कहा।
यमुना कॉलोनी स्थित लोनिवि सभागार में गुरुवार को विभागीय समीक्षा बैठक में महाराज ने कहा कि सभी पुलों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए। लंबित और निर्माणाधीन सड़कों की जनपदवार समीक्षा भी हो। उन्होंने सड़क की मोटाई, डामरीकरण, निर्माण सामग्री, लैब टेस्ट और थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच को अनिवार्य रूप से गंभीरता से लेने के निर्देश दिए।
मंत्री ने वैकल्पिक मार्गों और डायवर्जन वाले स्थानों पर स्पष्ट साइन बोर्ड लगाने को कहा। उन्होंने सड़क संकेतकों को वाहन चालकों को आसानी से दिखाई देने वाले स्तर पर लगाने के निर्देश भी दिए, ताकि आवागमन के दौरान लोगों को परेशानी न हो।
समीक्षा के बाद महाराज ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में आपदा के कारण प्रदेश में कुल 2,360 मार्ग क्षतिग्रस्त हुए। इनमें से 2,329 मार्गों को यातायात के लिए खोल दिया गया है। करीब 199 सड़कों पर ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिनके समाधान के लिए अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि गड्ढा पैच वर्क ऐप के माध्यम से सड़क संबंधी 1,953 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें से 1,327 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि 626 मामले अन्य विभागों से संबंधित होने के कारण उन्हें हस्तांतरित कर दिए गए हैं।
महाराज ने कहा कि प्रदेश में 34 निष्प्रयोज्य पुलों में से 21 पुलों को दोबारा उपयोग में लाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने अधिकारियों से सड़क और पुलों के निर्माण में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने को कहा, ताकि लोगों को सुरक्षित और बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके।
