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13 संस्कृत गांवों में अब सालभर होंगे खास आयोजन

देहरादून। उत्तराखंड में संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि आदर्श संस्कृत ग्रामों में केवल विशेष अवसरों पर ही कार्यक्रम न हों, बल्कि पूरे वर्ष नियमित रूप से संस्कृत संभाषण और अन्य गतिविधियां आयोजित की जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को संस्कृत भाषा पढ़ाने के साथ वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों की जानकारी भी दी जानी चाहिए। इसके लिए बच्चों की आयु और रुचि के अनुरूप सरल एवं प्रभावी माध्यम तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है। इसके माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कार और जीवन मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ रही है। हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा विश्व कल्याण, सद्भाव और मानवता का संदेश देती है। संस्कृत के जरिए नई पीढ़ी को इस विरासत से प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है।

धामी ने चारधाम के अलावा हर की पैड़ी, जागेश्वर धाम, आदि कैलाश, पूर्णागिरि, सुरकंडा देवी, धारी देवी, गर्जिया देवी मंदिर और वीरभद्र ऋषिकेश सहित प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार की प्रभावी पहल करने के निर्देश दिए। इन स्थलों पर संस्कृत के श्लोक, प्रेरक वाक्य और उनके सरल अर्थ प्रदर्शित करने पर भी जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा है और इसके संरक्षण-संवर्धन के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। आगामी कुंभ को देखते हुए हरिद्वार में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए।

सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने बताया कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम शुरू किया जा चुका है। इनमें संस्कृत को दैनिक बोलचाल और व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यार्थियों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति और प्रतिभा सम्मान योजनाएं संचालित हैं। संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण तथा आधुनिक तकनीक में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

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