रामनगर। प्रकृति, जंगल और वन्यजीवों की अनकही कहानियों को साहित्य के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से रामनगर में चार दिवसीय कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल का शुभारंभ हुआ। राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने महोत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि कॉर्बेट की असली कहानी अब साहित्य के माध्यम से दुनिया के सामने आएगी।
वन मंत्री ने कहा कि जिम कॉर्बेट की धरती केवल पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साहित्य और संवाद के माध्यम से कॉर्बेट के जंगलों, वन्यजीवों और यहां की लोक परंपराओं से जुड़ी कहानियों को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रकृति और अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। साहित्यकारों और विशेषज्ञों के संवाद से जंगल और वन्यजीव संरक्षण को लेकर नई सोच विकसित होगी।
महोत्सव में देश-विदेश से लेखक, वैज्ञानिक, वन्यजीव फोटोग्राफर, इतिहासकार और कहानीकार हिस्सा लेने पहुंचे हैं। विभिन्न सत्रों में हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, उत्तराखंड की लोक परंपराओं, वन्यजीव संरक्षण और जंगलों से जुड़े सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
आयोजन में वन विभाग के अधिकारियों के साथ स्थानीय लोग और उद्यमी भी भागीदारी कर रहे हैं। सभी मिलकर पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को लेकर नई रूपरेखा तैयार करने पर विचार कर रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि जिम कॉर्बेट के प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उनके अनुभव और दृष्टिकोण से प्रेरणा लेकर जंगलों और वन्यजीवों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में काम किया जा सकता है।
आयोजकों के अनुसार, कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक संगीत और जंगलों से जुड़ी अनसुनी कहानियों को व्यापक मंच देने की पहल है। रामनगर में आयोजित यह महोत्सव साहित्य और प्रकृति के बीच संवाद को नई दिशा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने का प्रयास भी है।
