लखनऊ/हरिद्वार। भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से लखनऊ में प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला आयोजित की गई। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि रहे, जबकि देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने अध्यक्षता की। कार्यक्रम का आयोजन अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के तहत किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को दिशा देने वाले संस्कारों और मूल्यों की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तक इन मूल्यों को पहुंचाने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार जागृत और संस्कारवान शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ चरित्र, कर्तव्यबोध और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
योगी ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के योगदान को भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक स्वयं अनुशासन, संवेदना, संस्कार और राष्ट्रनिष्ठा का उदाहरण बनेगा तो विद्यार्थी भी इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएंगे।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से कक्षा पांच से महाविद्यालय स्तर तक विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। इस परीक्षा से बड़ी संख्या में विद्यार्थी जुड़े हैं।
कार्यक्रम में गायत्री परिवार की स्मारिका का विमोचन किया गया। साथ ही भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उत्तर प्रदेश के शीर्ष 10 विद्यालयों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधायक राजेश्वर सिंह सहित कई गणमान्य लोग और प्रदेशभर से आए शिक्षक मौजूद रहे।
