नई दिल्ली। छोटी दुकान हो या बड़ा शॉपिंग स्टोर, डिजिटल पेमेंट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। चाय की कुछ रुपये की कीमत चुकानी हो या हजारों रुपये की खरीदारी, मोबाइल से QR कोड स्कैन कर भुगतान करना आम हो गया है। सितंबर के यूपीआई आंकड़े भी डिजिटल पेमेंट की इसी बढ़ती लोकप्रियता की तस्वीर पेश करते हैं।
सितंबर में यूपीआई के जरिए कुल 24.07 अरब यानी 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। इन लेनदेन की कुल वैल्यू 29.37 लाख करोड़ रुपये रही। इस तरह सितंबर में औसतन हर दिन करीब 80.2 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए। वहीं रोजाना लेनदेन की औसत राशि करीब 97,913 करोड़ रुपये रही।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़ी। वहीं कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में भी करीब 18 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ है कि डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि, अगस्त की तुलना में सितंबर में कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या में मामूली कमी रही। इसके बावजूद रोजाना औसत लेनदेन और उनकी कुल राशि रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंची।
15 अक्टूबर से बदलने वाला है MDR नियम
यूपीआई से जुड़े ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर नया MDR फ्रेमवर्क लागू होने वाला है। हालांकि, इसका असर सभी यूपीआई ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा।
पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेगा। यानी परिवार, दोस्तों या रिश्तेदारों को यूपीआई के जरिए पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। प्रस्तावित व्यवस्था मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदारों और व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतान से संबंधित है।
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि MDR का शुल्क भुगतान करने वाले ग्राहक के बजाय भुगतान प्राप्त करने वाले मर्चेंट से संबंधित होगा। यानी सामान्य ग्राहक के लिए यूपीआई से भुगतान करने की प्रक्रिया पर सीधे शुल्क लगाने की बात नहीं है।
लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन से संकेत मिलता है कि QR कोड और यूपीआई आधारित भुगतान देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं।