विकलांगता प्रमाण पत्र के नाम पर मांगी रिश्वत, जिला अस्पताल का डॉक्टर गिरफ्तार

रुद्रप्रयाग, 29 सितंबर। रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अंकुर ठाकुर को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि डॉक्टर ने शिकायतकर्ता से विकलांगता प्रमाण पत्र जारी कराने के एवज में रिश्वत की मांग की थी।

सतर्कता विभाग के मुताबिक, मामले की शिकायत टोल फ्री नंबर 1064 पर की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जिला अस्पताल में तैनात ऑर्थोपेडिक सर्जन विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उससे पांच हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले की प्राथमिक जांच शुरू की।

जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, सतर्कता सेक्टर देहरादून के निर्देश पर ट्रैप टीम का गठन किया गया। टीम ने शिकायत की पुष्टि के बाद आरोपी डॉक्टर को रिश्वत लेते पकड़ने के लिए कार्रवाई की योजना तैयार की।

मंगलवार को सतर्कता विभाग की टीम ने नियोजित तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता द्वारा पांच हजार रुपये दिए जाने के दौरान टीम ने डॉ. अंकुर ठाकुर को कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद विभाग ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया है।

सतर्कता विभाग अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विकलांगता प्रमाण पत्र सरकारी योजनाओं और विभिन्न सुविधाओं का लाभ लेने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। ऐसे में प्रमाण पत्र जारी करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप को सतर्कता विभाग ने गंभीरता से लिया और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की।

विभाग ने लोगों से भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें सामने आने पर टोल फ्री नंबर 1064 के माध्यम से सूचना देने की अपील की है। मामले में आगे की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद आरोपों से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.