संवाददाता
रांची। बड़ा तालाब स्थित निशा बैंक्वेट्स में बुधवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में शहर के जनप्रतिनिधियों, साहित्य प्रेमियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिकों ने हिस्सा लिया। अतिथियों ने दिनकर के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

समारोह में रांची की महापौर रौशनी खलखो ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की कविताएं राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान की प्रतीक हैं। उनकी कालजयी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है, ताकि युवा राष्ट्रभक्ति और सामाजिक दायित्वों से प्रेरणा ले सकें।
पूर्व विधायक डॉ. जीतू चरण राम ने कहा कि दिनकर की कविताओं में शोषित और वंचित वर्ग की आवाज सुनाई देती है। उनकी रचनाएं सामाजिक बदलाव और वैचारिक जागृति का माध्यम हैं। अशोक प्रधान ने कहा कि दिनकर ने अपनी ओजस्वी वाणी से देशवासियों में राष्ट्रभावना जगाई, जबकि पूर्व विधायक समरी लाल ने उन्हें केवल कवि नहीं, बल्कि युगद्रष्टा बताया।
हिंदू जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम शर्मा ने कहा कि दिनकर किसी एक वर्ग के नहीं, बल्कि पूरे जनमानस के कवि थे। स्वतंत्रता आंदोलन से पहले उनकी रचनाओं में विद्रोह की चेतना दिखाई देती है, वहीं स्वतंत्र भारत में उनका साहित्य सामाजिक चेतना और सृजनशीलता का वाहक बना।
सीमा शर्मा ने कहा कि दिनकर का ओजस्वी साहित्य सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करते हुए समाज को सही दिशा दिखाता है। रामाशीष सिंह ने दिनकर के जीवन, संघर्ष, साहित्यिक योगदान और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल सिंह ने की। मंच संचालन व्रजेश शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन धर्मेंद्र चौधरी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में रामाशीष सिंह, धनंजय सिंह और सौरभ कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
समारोह में पार्षद प्रीति रंजन, सुजाता भैया, डॉ. अंजेश, रामकुमार चौधरी, शिव शंकर सिंह, रामानुज शर्मा, हरिनंदन शर्मा, गोपाल प्रसाद, बलराम सिंह, ललित ओझा, रणधीर सिंह, मनोज सिंह, सुनील शर्मा, प्रकाश चंद्र सिंह, नेहा कुमारी, त्रिपुरारी शर्मा, सुषमा कुमारी और डॉ. अंजना समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। अंत में दिनकर की कविताओं का पाठ किया गया।