नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद बुधवार को और गहरा गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूची से जुड़े फैसले देश और संविधान के खिलाफ हैं। उन्होंने एक वीडियो साझा कर चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जो कुछ किया जा रहा है, वह गलत है और समय आने पर इसकी जवाबदेही तय होगी।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में ‘वोट चोरी’ को भारतीय नागरिकों के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला बताया। उन्होंने इसके लिए भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर आरोप लगाए। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। यह राजनीतिक प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब चुनाव आयोग के कामकाज और SIR को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में बताया गया कि आपत्तियां मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटा से जुड़े तकनीकी प्रबंधन जैसे मुद्दों पर थीं।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सहमति से लिए गए।
SIR की शुरुआत बिहार में जून 2025 में हुई थी और इसके बाद इसे अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। इस प्रक्रिया को लेकर मतदाता सूची की शुद्धता के साथ-साथ पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस जारी है।