नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आयोग ने पार्टी के आधिकारिक नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावे के बीच लिया गया है।
आयोग ने दोनों गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। शुक्रवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह मिला। यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है और पार्टी के मूल नाम व चिन्ह पर अंतिम निर्णय बाद में किया जाएगा।
चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ममता बनर्जी के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि उन सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं की है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में चुनाव आयोग और भाजपा पर गंभीर आरोप भी लगाए। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी आयोग के फैसले की आलोचना की। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी के संघर्ष से बनी पार्टी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और अपने दल द्वारा जमा किए गए हलफनामों का मुद्दा उठाया।
वहीं, पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं ने आयोग के फैसले को पार्टी के अंदरूनी विवाद से जोड़ते हुए अलग प्रतिक्रिया दी है। चुनाव आयोग के आदेश के बाद दोनों गुट अब आगामी उपचुनावों में अलग नाम और प्रतीकों के साथ मैदान में उतरेंगे।