नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत-चीन सीमा को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर लगातार बातचीत के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की तैनाती में काफी कमी आई है। मंत्रालय ने उत्तरी सीमाओं पर भारतीय सेना की मजबूत मौजूदगी और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने की तैयारियों पर भी जोर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, एलएसी और प्रशिक्षण क्षेत्रों में भारत की ओर से करीब 10 ब्रिगेड आकार की सेना तैनात किए जाने के बाद उत्तरी सीमा के दूसरी तरफ चीनी सैनिकों की संख्या में कमी देखी गई। भारतीय सेना ने एलएसी के सभी सेक्टरों में अपनी तैनाती मजबूत रखी है। पैदल सेना, टैंक, आर्टिलरी और एयर डिफेंस जैसी लड़ाकू शाखाओं को भी प्रभावी ढंग से तैनात किया गया है।
भारत और चीन के बीच सीमा मुद्दे पर बातचीत भी जारी रही। मार्च और जुलाई 2025 में वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी) की 33वीं और 34वीं बैठक हुई। वहीं, विशेष प्रतिनिधियों के स्तर की वार्ता भी दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देश मतभेदों को टकराव के बजाय बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय वायुसेना की भूमिका को भी प्रमुखता से रेखांकित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए और जवाबी ड्रोन तथा यूएवी हमलों के दौरान भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। स्वदेशी आकाश सहित विभिन्न एयर डिफेंस प्रणालियों और इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में एस-400 प्रणाली की लंबी दूरी की क्षमता का भी जिक्र है। दावा किया गया है कि एक अभियान में पाकिस्तानी विशेष मिशन विमान को 314 किलोमीटर की दूरी से सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा हालात नियंत्रण में हैं, हालांकि सीमा क्षेत्र में अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।