कोलकाता। सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी और अधिकारी शुक्रवार को देशव्यापी हड़ताल पर हैं। बैंकिंग क्षेत्र की यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से उठाई जा रही इस मांग पर सरकार की ओर से अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यूनियनों ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन के उपाध्यक्ष सुभ्रज्योति चटर्जी ने बताया कि शुक्रवार की हड़ताल का प्रमुख मुद्दा पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करना है। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस इस मांग को लेकर पहले ही 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा कर चुका है। यदि इसके बावजूद सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो 26 अक्टूबर से लगातार हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
चटर्जी के अनुसार बैंक यूनियनों की कई अन्य मांगें भी हैं, लेकिन फिलहाल पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था सबसे प्रमुख मुद्दा है। उनका दावा है कि सरकार इस प्रस्ताव को पहले ही स्वीकार कर चुकी है। वर्ष 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते और बैंकिंग उद्योग के वेतन संशोधन समझौते के दौरान पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी। इसके बावजूद इसे अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि पांच दिवसीय व्यवस्था लागू होने से शनिवार और रविवार को नियमित अवकाश मिलेगा। इससे कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन में सुधार होगा। वहीं, यूनियनों का तर्क है कि बैंकिंग सेवाओं का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल माध्यमों से संचालित होता है, इसलिए अवकाश के दौरान भी ग्राहक ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और अन्य डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे।
बैंक यूनियनों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है। साथ ही स्पष्ट किया है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।