नई दिल्ली। 12-13 सितंबर को होने वाली ब्रिक्स शिखर बैठक का असर दिल्ली के होटल कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी के कई लक्जरी होटलों में इन तारीखों के दौरान एक रात ठहरने का किराया बढ़कर एक लाख से 2.50 लाख रुपये तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन के चलते मध्य दिल्ली और राजनयिक क्षेत्र के आसपास स्थित प्रमुख होटल लगभग पूरी तरह बुक हो चुके हैं।
होटल उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक दिल्ली में लक्जरी होटलों की संख्या सीमित है, जबकि मध्यम श्रेणी के ब्रांडेड होटलों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान कमरों की मांग अचानक बढ़ने से किराये में तेज उछाल देखने को मिलता है। जी20 जैसे आयोजनों के दौरान भी राजधानी के होटल ढांचे पर दबाव सामने आ चुका है।
एचवीएस एनारॉक के प्रबंध निदेशक के अनुसार, दिल्ली जैसे बाजारों में होटल कमरों की मांग नए होटलों के निर्माण की तुलना में काफी तेजी से बढ़ी है। ब्रिक्स जैसे बड़े आयोजन इस मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच अंतर को और स्पष्ट कर देते हैं। ऐसे आयोजनों में प्रतिनिधिमंडल, राजनयिकों और प्रोटोकॉल टीमों के लिए एक साथ बड़ी संख्या में कमरों की जरूरत होती है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2025 तक दिल्ली में करीब 21 हजार ब्रांडेड होटल कमरे थे, जबकि बैंकॉक में इनकी संख्या करीब 69,700 थी। दिल्ली-एनसीआर में ब्रांडेड होटल आपूर्ति का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा मझोली और उससे निचली श्रेणी में आता है। बाकी आपूर्ति महंगे और लक्जरी होटल वर्ग में केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में किफायती और मझोली श्रेणी के ब्रांडेड होटलों के विकास की बड़ी संभावनाएं हैं।
रैडिसन होटल ग्रुप के दक्षिण एशिया प्रमुख ने भी कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन जैसे आयोजन किसी शहर की होटल क्षमता और कमरे की विविधता को सामने लाते हैं। उन्होंने बताया कि मध्य दिल्ली स्थित उनका होटल और आसपास के कई अन्य होटल पूरी तरह बुक हैं।
इस बढ़ती मांग को देखते हुए होटल डेवलपर भी राजधानी में नई परियोजनाओं पर ध्यान दे रहे हैं। शैलेट होटल्स के आगामी ताज दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट होटल से भी दिल्ली में होटल कमरों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।