लंदन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे के दौरान रविवार को लंदन में उनके कार्यक्रम के विरोध में प्रदर्शन हुआ। भागवत भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लंदन पहुंचे थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट स्क्वायर पर एकत्र हुए और उनके दौरे का विरोध किया।
प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर और बैनर के जरिए अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और तस्वीरें ‘साउथ एशिया सॉलिडेरिटी’ नामक एक्स अकाउंट से साझा किए गए। प्रदर्शनकारियों ने आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों पर भारत में अल्पसंख्यकों और छात्रों के खिलाफ काम करने के आरोप लगाए। उन्होंने भारतीय छात्रों और अल्पसंख्यकों के समर्थन में आवाज उठाने की बात कही।
विरोध प्रदर्शन के बीच मोहन भागवत ने लंदन में आयोजित प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ को संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं की जन्मभूमि और कर्मभूमि को लेकर उनसे सवाल पूछा गया।
भागवत ने कहा कि हिंदुत्व की दृष्टि से कर्मभूमि वह स्थान है, जहां व्यक्ति की निष्ठा होती है। उनके अनुसार ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं की कर्मभूमि ब्रिटेन है। उन्होंने कहा कि यदि ब्रिटिश हिंदू अच्छे और सच्चे हिंदू हैं तो ब्रिटेन और भारत के हितों के बीच टकराव की स्थिति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कभी ऐसी परिस्थिति बनती है, जिसमें दोनों देशों के हितों में से किसी एक को प्राथमिकता देने का सवाल सामने आए, तो ब्रिटिश हिंदू ब्रिटेन के साथ खड़े होंगे, क्योंकि वही उनकी कर्मभूमि है। वहीं, जन्मभूमि का संबंध व्यक्ति के जन्म और उन मूल्यों से है, जो उसे जीवन में दिशा देते हैं।
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनके ब्रिटेन दौरे को लेकर वहां विरोध और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रवासी हिंदुओं की पहचान, निष्ठा और उनकी सामाजिक भूमिका से जुड़े विषयों पर भी अपनी बात रखी।