देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत प्रदेश के राजकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले पात्र छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में 11 हजार छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए केवल मेहनत ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही दिशा, बेहतर रणनीति, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास भी जरूरी है। पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के कई प्रतिभाशाली युवा आर्थिक कठिनाइयों और संसाधनों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण कोचिंग से वंचित रह जाते हैं। सरकार का प्रयास है कि ऐसी परिस्थितियां किसी युवा के सपनों में बाधा न बनें।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। राज्य के युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप बेहतर अवसर और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल सरकारी नौकरी तक सीमित रखना नहीं है। युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने के लिए स्वरोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास, उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई युवा गांवों में लौटकर कृषि-बागवानी, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े व्यवसाय शुरू कर रहे हैं, जिससे रिवर्स पलायन को भी बढ़ावा मिला है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के ढाई लाख से अधिक युवा विद्यार्थियों के साथ वैचारिक मंथन कर उनके सुझाव लिए जा रहे हैं। युवाओं की आकांक्षाओं और रोजगार संबंधी विषयों पर विशेष ध्यान देने के लिए राज्य में अलग ‘युवा आयोग’ बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। सरकार चाहती है कि युवा योजनाओं के लाभार्थी ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की नीतियों और विकास की दिशा तय करने में सक्रिय भागीदार भी बनें।